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माउंट आबु मे मिलेगा मात्र 8 रूपय मे भोजन

आबू पर्वत, 20 अगस्त 1944 मे बॉम्बे मे जन्मे भारत के 6ठें प्रधानमंत्री व भारत रत्न श्री राजीव गांधी की 76वीं जयंती पर एसबीआई शाखा, मुख्य बाज़ार के समीप स्थित पुराने राजस्थली भवन में उनकी माता के नाम पर 'इंदरा रसोई योजना' का शुभारंभ किया गया। उपखंड कार्यालय मे चल रही मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत के साथ 'विडियो कॉन्फ्रेंस' के कारण प्रातः 11 बजे पूर्वनिर्धारित कार्यक्रम कुछ देरी से प्रारम्भ हुआ ।

विडियो कॉन्फ्रेंस समाप्ती के तुरंत बाद एसडीएम श्री गौरव सैनी, पालिकाध्यक्ष जीतू राणा, पार्षदगण एवं अन्य अधिकारी राजस्थली भवन मे पहुंचे और भवन, रसोई, बैठने की व्यवस्था आदि का निरीक्षण किया, साथ ही भोजन को चख कर उसकी गुणवत्ता और स्वाद का भी जायजा लिया। कुछ समय पश्चात समाजसेवियों और भामाशाहों द्वारा 300 से अधिक कूपन क्रय कर जरूरतमंदों और गरीबों को भोजन करवाया गया जिसमे प्रथम थाली पालिकाध्यक्ष जीतू राणा और दूसरी थाली उपखंड अधिकारी श्री सैनी ने अपने हाथों से परोसी ।
( फोटो मे निरीक्षण करते बाएँ से - भूमि शाखा प्रभारी महेंद्र बंजारा, एसडीएम डॉ गौरव सैनी, पालिकाध्यक्ष जीतू राणा व कॉंग्रेस वरिष्ठ पार्षद नारायण सिंह भाटी )

'' कोई भी भूखा नहीं सोये '' के संकल्प को साकार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 'इंदरा रसोई योजना' के तहत जरूरतमंदों को 8 रूपय मे पौष्टिक एवम स्वादिष्ट भोजन करवाने का शुभारंभ 20, अगस्त 2020 से सम्पूर्ण प्रदेश मे किया गया है जिसके अंतर्गत स्थानीय संस्थाओं द्वारा प्रदेश की 213 नगरी निकायों मे 358 रसोई के माध्यम से बैठाकर भोजन की व्यवस्था की गई है। इस योजना मे राज्य सरकार द्वारा 12 रूपय प्रति थाली अनुदान दिया जाएगा । भोजन का समय सुबह 8:30 से दोपहर 1 बजे व शाम 5 बजे से रात 8 बजे तक रहेगा ।

15 दिसम्बर 2016 को प्रदेश मे तत्कालीन भाजपा सरकार द्वारा ''अन्नपूर्णा रसोई योजना'' प्रारम्भ की गई थी जिसमे 5 रूपये मे नाश्ता व 8 रूपय मे भोजन की सुविधा थी जो 191 शहरी निकायों मे 500 भोजन वैनों द्वारा मुहैया कराई जाती थी । अन्नपूर्णा रसोई योजना की शुरुआत श्रमिकों, रिक्शावालों, विध्यार्थियों, ठेलेवालों, बुजुर्गों, कामकाजी महिलाओं एवम असहायों व जरूरतमन्द व्यक्तियों के स्वास्थ्य को ध्यान मे रखकर की गई थी । आबू पर्वत में अन्नपूर्णा वैनें बस स्टैंड, एमके चौराहे, अर्बुदा माता मंदिर पार्किंग, देलवाड़ा मंदिर आदि जगहों पर भोजन मुहैया करातीं थीं जिससे आमजन के साथ साथ पर्यटक भी लाभान्वित होता था।      

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