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ब्रह्माकुमारी संगठन में राष्ट्रीय संत सम्मेलन संपन्न

मानव को मूल्यों का पाठ पढ़ाते हैं धर्मग्रंथ
ब्रह्माकुमारी संगठन में राष्ट्रीय संत सम्मेलन संपन्न
माउंट आबू, २२ मई
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में धार्मिक सेवा प्रभाग द्वारा आध्यात्म से विश्व का नवनिर्माण विषय पर आयोजित तीन दिवसीय अखिल भारतीय सम्मेलन सोमवार को विभिन्न परिचर्चाओं के साथ संपन्न हुआ।
समापन सत्र को संबोधित करते हुए महामण्डेलश्वर गौऋषि स्वामी ज्ञानस्वरूपानंद अक्रिय महाराज ने कहा कि धर्मगं्रथ मानव को सत्य व अहिंसा का पाठ पढ़ाते हैं लेकिन उन शिक्षाओं को मन की भूमि पर अंकुरित करने के लिए शिव परमात्मा से संबंध जोडऩा जरूरी है। मनुष्य के मन पर दैहिक धर्मों का पर्दा पडऩे से नैतिक मूल्यों का हनन हो रहा है। अब समय आ गया है कि विश्व के सभी लोग देह के धर्म से ऊपर उठकर अपने निजी स्वधर्म को पहचानकर एकजुट हो जाएं। आधुनिकता के प्रभाव से डगमगाती अध्यात्मिकता को संबल देने का अदभुत उदाहरण ब्रह्माकुमारी संगठन की ओर से विश्व में शान्ति स्थापन करने का कार्य सबके समक्ष है।
महाराष्ट्र से आये ब्रह्मदेव दिव्यप्रकाश स्वामी प्रबोधानंद ने कहा कि मोहग्रस्ति दु:खी व्यक्ति के मन को सच्ची शान्ति की अनुभूति के लिए अध्यात्म का सहारा लेना होगा। चित्त की पवित्रता आध्यात्म से ही प्रखर होती है। भौतिकता व आध्यात्मिकता का संतुलन रखने से जीवन के मर्म को समझा जा सकता है। 
बनारस से आई राजयोगिनी सुरेंद्र बहन ने कहा कि विश्व को नई राह दिखाना ही संत, महात्माओं का कत्र्तव्य है। सर्वोच्च सत्ता परमपिता शिव परमात्मा के विश्व कल्याण के कत्र्तव्य में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करने जैसा पुनीत कार्य कर रहे संत निसंदेह ही जनमानस के लिए प्रकाश की तरह हैं।
अयोध्या से आये ब्रह्मर्षि महेश योगी ने कहा कि प्रेम, सत्कार, सदभावना, भाईचारे का प्रकाश फैलाने का कार्य बिना समर्पणता के नहीं हो सकता है। विश्व सेवा में समर्पित ब्रह्माकुमारी संगठन की सेवाओं का प्रकाश जन-जन के जीवन को प्रकाशित कर रहा है। खुली किताब की तरह संस्था के संस्थापक प्रजापिता ब्रह्मा बाबा का जीवन हर मानव के लिये प्रेरणादायी रहा। जिनकी बदौलत विश्व के नवनिर्माण का कार्य तीव्र गति से संपूर्णता की ओर बढ़ रहा है।
प्रभाग की राष्ट्रीय अध्यक्षा राजयोगिनी मनोरमा बहन ने कहा कि परमात्मा का ज्ञान आत्मा को समर्थ बनाता है। जिससे आत्मिक शक्तियां विकसित होने से समाज के हर वर्ग का उत्थान करने की मानसिकता को बल मिलता है। किसी भी देश व व्यक्ति की पहचान उसकी संस्कृति से होती है। समाज से लोप हो रही मानवीय संवेदना, सुख, शांति, प्रेम, पवित्रता, सदभावना आदि मूल्यों को पुनस्र्थापित करना सभी धर्मात्माओं का परम कत्र्तव्य है। इसका एकमात्र विकल्प आध्यात्मिक ज्ञान है।
ऋषिकेश से आए महामंडलेश्वर स्वामी अभिषेक चैतन्य महाराज ने कहा कि नये विश्व के निर्माण की नींव आध्यात्म है। भोगवाद की चपेट में आकर शोषण की बढ़ती प्रवृत्ति पर अंकुश लगाना चुनौतीपूर्ण कार्य है लेकिन ब्रह्माकुमारी संगठन का दार्शनिक शास्त्र समाज में असंतुष्टता, दु:ख, दरिद्रता, रोग, प्रतिशोध की भावना के अंधकार को समाप्त करने में अहम भूमिका अदा कर रहा है। 
सम्मेलन में साध्वी शान्त चेतन आनंद, सत्य साई सेवा संस्थान के जयाभगत, प्रभाग संयोजिका बीके ऊषा बहन, प्रभाग के मुख्यालय संयोजक बीके रामनाथ, भरतपुर से आई राजयोगिनी बीके कविता बहन आदि ने भी विचार व्यक्त किए।

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