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टोकन व्यवस्था , गुलामी की प्रतीक - गांगड़िया

मॉनिटरिंग कमिटी ने किया स्थापित , वही करे निरस्त..

आमजन का हुआ शोषण , अमीरों ने दाम देकर किया काम पूरा - गांगड़िया

माउंट आबू
नगरपालिका पार्षद सैराभ गांगड़िया ने मॉनिटरिंग कमिटी के अध्यक्ष को मेल द्वारा पत्र प्रेषित कर उच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए कमिटी की बैठक बुलाने का निवेदन किया है । उन्होंने कहा है की टोकन व्यवस्था का सरलीकरण किया जाए या फिर उसे निरस्त कर दिया जाए । यह व्यवस्था पूर्व में मॉनिटरिंग समिति द्वारा ही स्थापित की गई थी व इसे निरस्त करने का या फिर सरलीकरण करने का अधिकार भी मॉनिटरिंग समिति के पास ही है  ।

पत्र के अनुसार टोकन व्यवस्था उस समय लागू की गई थी जब मास्टर प्लान पर असमंजस की स्तिथि थी व विभिन्न न्यायालयों में आबू पर्वत पर निर्माण संबंधित वाद लंबित थे । अब स्तिथि बहुत हद तक क्लियर हो चुकी है । यह एक अस्थाई व्यवस्था थी पर समय के साथ इसको कानून का रूप दे दिया गया जो कि गलत है । इस जटिल प्रक्रिया की वजह से आम जन बेहद परेशान है , त्रस्त है । इसके साथ ही उन्होंने अन्य कई समस्याओं के निदान का भी निवेदन किया है ।

ये है पत्र ..

सेवा में ,
अध्यक्ष महोदय जी ,
मोनिटरिंग समिति
Ecosensitive Zone , माउंट आबू 
जिला सिरोही , राजस्थान ।

विषय - मोनिटरिंग समिति की बैठक आहूत करने बाबत निवेदन ।

महोदय श्री , सादर वंदे !
माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के उपरांत यह तो स्पष्ट हो गया है कि मॉनिटरिंग समिति के कार्य करने पर व निर्णय लेने पर कोई रोक नही है । अतः आप से व आप की समिति से विनम्र आग्रह है कि अतिशीघ्र मॉनिटरिंग समिति की बैठक का आह्वान कर, आबू के जन हित व पर्यावरण संरक्षण के गंभीर मुद्दों पर चिंतन कर समाधान हेतु मार्गदर्शन व आदेश करावें ।

कुछ विषय आप के समक्ष , समाधान व निर्णय हेतु प्रस्तुत है -
1- बिपरजोय चक्रवात में हुए नुकसान व घरों की मरम्मत हेतु किए गए आवेदनों पर त्वरित कार्यवाही व repairs हेतु निर्माण सामग्री का आबू पर्वत पर ही उपलब्ध करवाने का निर्णय व प्रयोजन करवाना ।

2- महोदय श्री , आबू पर्वत पर स्थापित निर्माण सामग्री हेतु टोकन व्यवस्था का सरलीकरण करना या फिर टोकन व्यवस्था को निरस्त करना । यह व्यवस्था पूर्व में मॉनिटरिंग समिति द्वारा ही स्थापित की गई थी व इसे निरस्त करने का या फिर सरलीकरण करने का अधिकार भी मॉनिटरिंग समिति के पास ही है  ।

महोदय श्री , यह व्यवस्था उस समय लागू की गई थी जब मास्टर प्लान पर असमंजस की स्तिथि थी व विभिन्न न्यायालयों में आबू पर्वत पर निर्माण संबंधित वाद लंबित थे । अब स्तिथि बहुत हद तक क्लियर हो चुकी है । यह एक temporary व्यवस्था थी पर समय के साथ इसको कानून का रूप दे दिया गया जो कि गलत है । इस जटिल प्रक्रिया की वजह से आम जन बेहद परेशान है त्रस्त है ।

महोदय श्री, इस impractical प्रक्रिया ने आबू पर्वत पर निर्माण सामग्री के काला बज़ारी syndicate को जन्म दिया । गरीबों का, सामान्य परिवारों का शोषण होता गया व बड़े लोगो ने मनमाने दाम पर उपलब्ध निर्माण सामग्री का उपयोग कर अपना कार्य पूर्ण किया  ।

महोदय श्री , जब कानून के तहत ( बिल्डिंग byelaws 2019 ) point number 5 के तहत प्लास्टर करने हेतु , पुनः फर्श बनाने हेतु व अपने मालिकी के भूखण्ड पर छज्जा निर्माण हेतु किसी भी स्वीकृति की आवश्यकता नही है तो फिर इन कार्यों के लिए निर्माण सामग्री हेतु टोकन लेना कहाँ तक न्यायसंगत है ,यह एक विचारणीय विषय है । इन छोटे छोटे कार्य हेतु आबू पर्वत के आमजन को परेशानी में डालना , धक्के खिलाना ,मानसिक रूप से व आर्थिक रूप से प्रताड़ित करना कहाँ का न्याय है ? टोकन व्यस्था एक ग़ुलामी का प्रतीक बन कर रह गया है व आबू वासी आज़ाद भारत में अब और ग़ुलाम बन कर नही रहना चाहते ।

आप से विनम्र आग्रह है कि इस पीड़ा से हमे मुक्त करवाने हेतु कोई ठोष निर्णय करावे और आबू वासियों को ग़ुलामी की बेड़ियो से मुक्त करावें ।

3- महोदय श्री , आबू पर्वत पर स्थित गरीब बस्तियो का मास्टर प्लान 2030 के तहत तीन श्रेणियों में वर्गीकरण किया गया है ।

- Upgradation( अम्बेडकर कॉलोनी )
- Redevelopment ( अन्य बस्ती )
- Rehabilitation ( सीतावन बस्ती )

इन प्रावधानों के तहत इन बस्तियों के विकास हेतु कोई ठोस योजना बनाई जावे ताकि इन गरीब बस्तियों में रहने वाले लोगो को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर मिले । इन बस्तियों में हर घर में बिजली ,पानी व शौचालय की basic मूल भूत सुविधाओं को उपलब्ध करवाना हमारा दायित्व बनता है । सरकार की योजना के तहत इन गरीब बस्तियों में योग्य परिवारों को पट्टे आवंटन हो यह निवेदन भी आप से करता हूँ । सीतावन में बसने वाले परिवारों को किसी अन्य जगह सम्मानपूर्वक विस्थापित किया जाना चाहिए ।

4- आबू पर्वत पर पुराने borewells को रिपेयर , डिसिल्टिंग व flushing की अनुमति प्रदान करावे ।

5- आबू पर्वत पर अभी तक कोई solid waste management की पालिसी नही है । ESZ नोटिफिकेशन 2009 के तहत इसकी अनिवार्यता बनती है जिसे लागू करवाना अतिआवश्यक है ।

6-आबू पर्वत स्थित sewerage ट्रीटमेंट प्लांट अभी पूर्ण रूप से कार्यरत नही है । Ecosensitive ज़ोन में एक effective STP का होना बहुत आवश्यक है ।

7- ESZ में environment friendly fuel ( CNG एंड Electric charging स्टेशन) की व्यवस्था होना चाहिये जिसके लिए ईमानदार प्रयास की आवश्यकता है ।

8- आबू पर्वत ESZ पर Solar Plants स्थापित करने हेतु एक योजना को लागू करना चाहिए । जो भी व्यक्ति सोलर प्लांट स्थापित करना चाहे उसे प्रोत्साहन मिलना चाहिए व आवश्यक सुविधा भी मिलनी चाहिए ।

9- यह कहने में कहीं अतिशियोक्ति नही होगी कि आबू पर्वत एक hit tourist डेस्टिनेशन है । परंतु यह एक ecofragile स्थल है यह भी भूलना बड़ी गलती होगी । टूरिज्म व पर्यावरण प्रतिरक्षा का एक सुंदर संतुलन बना रहे यह आबू पर्वत के सुखद अस्तित्व के लिए अतिआवश्यक है । यहाँ पर दुर्लभ प्रजाति की वनस्पति , पेड़ इत्यादि तो है ही उसके साथ यहाँ पर विभिन्न प्रजाति के पशु पक्षी भी पाए जाते है । उनके हितों की चिंता करना व उसके लिए पूर्ण रूप से समर्पित रहना भी हमारा कर्तव्य बनता है । ESZ की Carrying Capacity पर भी ध्यान देने की अतिआवश्यकता हो गई है । कहीँ ऐसा न हो जाए कि आते समय मे यहाँ पर irreversable damage हो जाए व हमारे आने वाली पीढ़ियों को सिर्फ किताबों में ही आबू पर्वत के rich natural heritage की जानकारी मिले ।

उक्त सभी विषयों पर आप व आप की समिति संवेदनापूर्ण विचार कर निर्णय करेगी ऐसी प्रार्थना व अपेक्षा ।

प्रणाम !
सौरभ गांगड़िया , 
पूर्व सदस्य , मॉनिटरिंग समिति , ESZ आबू पर्वत ।
19/07/23.

प्रतिलिपी -
श्रीमान कलेक्टर , सचिव मॉनिटरिंग समिति , आबू पर्वत ।
श्रीमान उपखंड अधिकारी , आबू पर्वत ।
श्रीमान DCF , आबू पर्वत ।

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